टीडीआई में महंगे घर खरीदने वालाें को बिजली निगम का झटका, नए कनेक्शन देने से इनकार

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टीडीआई में महंगे घर खरीदने वालाें को बिजली निगम का झटका, नए कनेक्शन देने से इनकार

जीटी रोड पर टोल टैक्स के पास टीडीआई में महंगे प्लॉट खरीदकर बिजली निगम ने बिल्डरों को झटका दिया है। निगम ने यहां नया बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा दी है। निगम बताता है कि टीडीआई ने केवल 1 एमवीए (1000 किलोवाट) लोड तक कनेक्शन जारी करने की अनुमति मांगी थी। यह लोड पूरा हो चुका है। अब टीडीआई को अपने पावर हाउस के माध्यम से अग्रोहा कनेक्शन का लोड उठाना होगा।

निगम के नए फैसले से टीडीआई प्रबंधन के साथ ही तीनों ने प्लॉट की खरीद और कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। यह फैसला काफी अहम है, क्योंकि टीडीआई कैंपस में 1500 प्लॉट हैं। ये 500 गज से लेकर 2500 गज तक के हैं। अब तक 250 मकान बन चुके हैं। मार्केट परिसर में 250 से अधिक दुकानें हैं। इनके अलावा 900 फ्लैट बीपीएल और ईडब्ल्यूएस के हैं। इनमें से आधे से ज्यादा आवंटित हो चुके हैं और 50 परिवार भी रह रहे हैं।

1. एचएसवीपी और बिजली निगम स्थापित करे पावर हाउस

टीडीआई इलेक्ट्रिसिटी विंग इंचार्ज मनोज राणा ने बताया कि कंपनी ने इस सेक्टर को काटने से पहले ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पास एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) के तौर पर बजट जमा कर दिया था। पावर हाउस बनाने का पूरा खर्च भी इसमें शामिल किया गया है। इस तरह पावर हाउस बनाने की पूरी जिम्मेदारी एचएसवीपी और बिजली निगम की है।

2. फीडर 1 एमवीए फीडर से अधिक नहीं ले जा सकता

बिजली निगम पानीपत के एसडीओ आदित्य कुंडू ने बताया कि टीडीआई के पास 11 केवीए का मात्र एक फीडर है। इस पर 1 एमवीए से ज्यादा लोड नहीं कर सकते। लाइन व ट्रांसफार्मर ओवरलोड न हो, इसके लिए कंपनी को पत्र लिखा है। अब कोई कनेक्शन जारी नहीं किया जाएगा। कनेक्शन तभी जारी किए जाएंगे जब कंपनी का अपना 132 केवी पावर हाउस होगा।

3. कंपनी के पास पैसा जमा है, यह पता नहीं है कि शिकंजा कहां शामिल है

एचएसवीपी पानीपत के ईओ विकास ढांडा ने बताया कि यह मामला मेरी जानकारी में आया है। टीडीआई का पैसा एचएसवीपी के पास जमा है, इससे पता चल जाएगा कि राशि कितनी है। अब देखना होगा कि पावर हाउस स्थापित करने की जिम्मेदारी किसकी है। किसी भी स्तर पर चूक की जाएगी।

अब तक कनेक्शन के साथ आवंटन की व्यवस्था की गई है

टीडीआई में अब तक सभी प्लॉट और फ्लैट आवंटित हो चुके हैं, इन सभी के मालिकों को आवंटन पत्र, आधार कार्ड और सिक्योरिटी फीस की प्रति बिजली निगम को जमा करनी थी। इसके बाद कनेक्शन जारी कर दिए गए। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

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बड़ा सवाल- जिस टीडीआई के लिए 39 करोड़ का आरओबी बना था, वहां 13 साल में पावर हाउस नहीं था
यह परियोजना 2007 में शुरू हुई थी। तीन साल बाद तत्कालीन कांग्रेस के शासन में टीडीआई फ्लाईओवर बनाया गया, जिसमें 39 करोड़ खर्च हुए। विरोधियों ने आरोप लगाया कि पुल का निर्माण सिर्फ टीडीआई को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 13 साल में तीनों दल जनता के लिए 3 लाख का पावर हाउस नहीं बना सके।